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Saturday, 2 June 2018
प्रकृति में ऐसे अनेक अजीब स्थान और अजीबोगरीब चीजे
बिखरी पडी है, जो मनुष्य के लिए पहेलियों के सिवा कुछ
भी नहीं ! ऐसे पहेलियाँ, जिन्हे सुलझाने के प्रयास में मानव
मस्तिष्क खुद ही उलझता जाता है, ऐसे ही एक जटिल और
सर खपाने वाली पहेली सं 1996 में सामने आई !
1996 के फरवरी माह में चाँद पर उतरे रूसी यान, लूना-9
ने चन्द्र धरातल के कुछ ऐसे चित्र धरती पर भेजे थे, जिन्हे
देखकर वैज्ञानिक आश्चर्य एवं विस्मय से भर गए ! वे उन
चित्रो को देखकर उनके बारे में कोई संतोषजनक उत्तर
न दे सके !
भेजे गए चित्र एक ऐसे क्षेत्र के थे, जहाँ पत्थरों की एक सीध
में जाती हुई कई लम्बी लम्बी कतारे थी ! ये चित्र चाँद के
जिस हिस्से के थे, उसे कथित रूप से "ओशन ऑफ़ स्टोमर्स"
कहा जाता है ! पत्थरो से निर्मित वे रहस्यमय कतारे बहुत
ही सफाई से एक सीध में बनी हुई थे और आश्चर्यजनक
रूप से हर पत्थर एक ही अकार एवं प्रकार का था ! सिर्फ
इतना ही नहीं , कतारो में लगे पत्थरो की दूरी भी विलक्षण
रूप से समान थी ! ऐसा लगता था मानो किसी ने चन्द्र
धरातल पर उतरने के लिए "एयरपोर्ट " के सामान निशान
लगे रखे थे !
आज तक वैज्ञानिक उन रहस्यमय पत्थरो से निर्मित लम्बी
लम्बी कतारो का कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए है !
अगर वे कटारे प्राकृतिक थे , तो इतनी सारी कतारे और प्रत्येक
कतार में लगे पत्थर में इतनी नफासत कैसे थी? या इसके
निर्माण में क्या किन्ही अदृश्य शक्तयो का हाथ था? शायद
आने वाला
प्राक्सीमा ब : सूर्य के निकटस्थ तारे की परिक्रमा करते जीवन की संभावना योग्य ग्रह की खोज
वैज्ञानिको ने सूर्य के निकटस्थ तारे ’प्राक्सीमा सेंटारी’ की परिक्रमा करते जीवन की संभावना योग्य ग्रह की खोज की है। प्राक्सीमा सेंटारी एक लाल वामन तारा है जो कि सूर्य से केवल 4.24 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।
जब भी सौर बाह्य ग्रहो की खोज मे पृथ्वी के आकार के छोटे ग्रहों की खोज होती है, एक सनसनी सी फ़ैल जाती है। पिछले कुछ सप्ताह से समाचारो मे लाल वामन तारे प्राक्सीमा सेंटारी की परिक्रमा करते एक पृथ्वी के जैसे ग्रह की खोज की अफ़वाहे सामने आ रही थी। खगोलशास्त्रीयों ने 24 अगस्त 2016 को इस खोज की पुष्टि कर दी है।
चिली की अंतरिक्ष वेधशाला ने प्राक्सीमा सेंटारी तारे की परिक्रमा करते हुये पृथ्वी के तुल्य द्रव्यमान वाले एक ग्रह की खोज की है। यह ग्रह हमारे खगोलिय पड़ोस मे है तथा केवल 4.24 प्रकाशवर्ष की दूरी पर है। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि यदि परिस्थितियाँ अनूकूल रही तो इस ग्रह की कक्षा ऐसी है कि यह इतना उष्ण होगा कि इस ग्रह की सतह पर द्रव जल की उपस्थिति होना चाहीये।
यह ग्रह हल्के लाल रंग से प्रकाशित होता है तथा एक तीन तारों वाली प्रणाली के सबसे छोटे तारे की परिक्रमा करता है जिसका नाम प्राक्सीमा सेंटारी है। यह तारा प्रणाली नरतुरंग तारामंडल(Centaurus) की ओर देखी जा सकती है।
इस तारा प्रणाली का मुख्य तारा अल्फा सेंटारी एक लंबे समय से विज्ञान फतांशी लेखको की पसंद रहा है, इस तारे को मानवीय खगोलीय यात्राओं का पहला पड़ाव माना जाता रहा है, साथ ही इस तारे को भविष्य मे पृथ्वी पर जीवन संभव ना होने की स्थिति मे भविष्य की मानव सभ्यता के लिये बचाव केंद्र माना जाता रहा है।
हार्वर्ड स्मिथसन सेंटर फ़ार आस्ट्रोफिजिक्स(Harvard-Smithsonian Center for Astrophysics) के वैज्ञानिक अवी लोवेब(Avi Loeb) के अनुसार प्राक्सीमा सेंटारी तारे के पास एक चट्टानी जीवन योग्य ग्रह आज से पांच अरब वर्ष पश्चात सूर्य की मृत्यु की स्थिति मे मानव के लिये नये घर के लिये सबसे प्राकृतिक चुनाव रहेगा।
प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी या मित्र सी, जिसका बायर नाम α Centauri C या α Cen C है, नरतुरंग तारामंडल में स्थित एक लाल बौना तारा है। हमारे सूरज के बाद, प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी हमारी पृथ्वी का सब से नज़दीकी तारा है और हमसे 4.24 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है। फिर भी प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी इतना छोटा है के बिना दूरबीन के देखा नहीं जा सकता। पृथ्वी से यह मित्र तारे (अल्फ़ा सॅन्टौरी) के बहु तारा मंडल का भाग नज़र आता है, जिसमें मित्र "ए" और मित्र "बी" तो द्वितारा मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण से बंधे हुए हैं, लेकिन प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी उन दोनों से 0.24 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है जिस से पक्का पता नहीं कि यह पृथ्वी से केवल उनके समीप नज़र आता है या वास्तव में इसका उनके साथ कोई गुरुत्वाकर्षक बंधन है।
प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी या मित्र सी, जिसका बायर नाम α Centauri C या α Cen C है, नरतुरंग तारामंडल में स्थित एक लाल बौना तारा है। हमारे सूरज के बाद, प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी हमारी पृथ्वी का सब से नज़दीकी तारा है और हमसे 4.24 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है। फिर भी प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी इतना छोटा है के बिना दूरबीन के देखा नहीं जा सकता। पृथ्वी से यह मित्र तारे (अल्फ़ा सॅन्टौरी) के बहु तारा मंडल का भाग नज़र आता है, जिसमें मित्र “ए” और मित्र “बी” तो द्वितारा मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण से बंधे हुए हैं, लेकिन प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी उन दोनों से 0.24 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है जिस से पक्का पता नहीं कि यह पृथ्वी से केवल उनके समीप नज़र आता है या वास्तव में इसका उनके साथ कोई गुरुत्वाकर्षण बंधन है।
प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी या मित्र सी, जिसका बायर नाम α Centauri C या α Cen C है, नरतुरंग तारामंडल में स्थित एक लाल बौना तारा है। हमारे सूरज के बाद, प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी हमारी पृथ्वी का सब से नज़दीकी तारा है और हमसे 4.24 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है। फिर भी प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी इतना छोटा है के बिना दूरबीन के देखा नहीं जा सकता। पृथ्वी से यह मित्र तारे (अल्फ़ा सॅन्टौरी) के बहु तारा मंडल का भाग नज़र आता है, जिसमें मित्र “ए” और मित्र “बी” तो द्वितारा मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण से बंधे हुए हैं, लेकिन प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी उन दोनों से 0.24 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है जिस से पक्का पता नहीं कि यह पृथ्वी से केवल उनके समीप नज़र आता है या वास्तव में इसका उनके साथ कोई गुरुत्वाकर्षण बंधन है।
इस ग्रह की खोज की घोषणा से पहले ही “ब्रेकथ्रू स्टारशाट( Breakthrough Starshot)” परियोजना के वैज्ञानिको ने अल्फा सेंटारी तारा प्रणाली की ओर इस सदी के अंत से पहले नन्हे अंतरिक्ष यान भेजने की योजना बनाई है। लेकिन इस ग्रह से निकट भविष्य मे कोई सूचना आने की आशा ना रखें। प्रकाशगति की 20% गति से चलने वाले अंतरिक्ष यान को प्राक्सीमा सेंटारी तक पहुंचने मे ही 20 वर्ष लग जायेंगे, उसके पश्चात उससे पृथ्वी तक कोई सूचना पहुंचने मे 4.24 वर्ष लग जायेंगे।
खगोल विज्ञान मे रूची रखने वाले जानते होंगे कि अल्फ़ा सेंटारी तारा प्रणाली मे किसी ग्रह की खोज की यह पहली खबर नही है। 2012 मे कुछ वैज्ञानिको ने इस प्रणाली के सूर्य के जैसे तारे अल्फ़ा सेंटारी बी की परिक्रमा करते पृथ्वी के द्रव्यमान के तुल्य वाले ग्रह की खोज की घोषणा की थी। लेकिन बाद के निरीक्षणो के इस ग्रह के अस्तित्व की पुष्टि नही हो आयी थी। यह माना गया था कि प्राप्त आंकड़ो मे कोई त्रुटि थी तथा इस तारे की आंतरिक गतिविधियों ने वैज्ञानिको को भ्रमित कर दिया था। इस ग्रह को प्राक्सीमा बी नाम दिया गया है और इस खोज के पीछे पेल रेड डाट(धूंधला लाल बिंदु (Pale Red Dot) अभियान के वैज्ञानिक है। यह नाम कार्ल सागन द्वारा नामकरण किये गये पृथ्वी के प्रसिद्ध चित्र Pale Blue Dot से प्रभावित है।
वैज्ञानिको के अनुसार यह खोज आश्चर्य मे डालने वाली नही है। पिछले दशक मे हुयी सौर बाह्य ग्रहों की खोज ने प्रमाणित किया है कि प्राक्सीमा सेंटारी जैसे लाल वामन तारों के पास ग्रहों के होने की संभावना अधिक होती है और इन तारो की परिक्रमा करते ग्रह छोटे, चट्टानी तथा सतह पर द्रव जल की उपस्थिति के लिये पर्याप्त रूप से उष्ण होते है।इस ग्रह को प्राक्सीमा बी नाम दिया गया है और इस खोज के पीछे पेल रेड डाट(धूंधला लाल बिंदु (Pale Red Dot) अभियान के वैज्ञानिक है। यह नाम कार्ल सागन द्वारा नामकरण किये गये पृथ्वी के प्रसिद्ध चित्र Pale Blue Dot से प्रभावित है।
वैज्ञानिको के अनुसार यह खोज आश्चर्य मे डालने वाली नही है। पिछले दशक मे हुयी सौर बाह्य ग्रहों की खोज ने प्रमाणित किया है कि प्राक्सीमा सेंटारी जैसे लाल वामन तारों के पास ग्रहों के होने की संभावना अधिक होती है और इन तारो की परिक्रमा करते ग्रह छोटे, चट्टानी तथा सतह पर द्रव जल की उपस्थिति के लिये पर्याप्त रूप से उष्ण होते है।
प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी या मित्र सी, जिसका बायर नाम α Centauri C या α Cen C है, नरतुरंग तारामंडल में स्थित एक लाल बौना तारा है। हमारे सूरज के बाद, प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी हमारी पृथ्वी का सब से नज़दीकी तारा है और हमसे 4.24 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है। फिर भी प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी इतना छोटा है के बिना दूरबीन के देखा नहीं जा सकता। पृथ्वी से यह मित्र तारे (अल्फ़ा सॅन्टौरी) के बहु तारा मंडल का भाग नज़र आता है, जिसमें मित्र “ए” और मित्र “बी” तो द्वितारा मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण से बंधे हुए हैं, लेकिन प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी उन दोनों से 0.24 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है जिस से पक्का पता नहीं कि यह पृथ्वी से केवल उनके समीप नज़र आता है या वास्तव में इसका उनके साथ कोई गुरुत्वाकर्षण बंधन है।
इस ग्रह की खोज की घोषणा से पहले ही “ब्रेकथ्रू स्टारशाट( Breakthrough Starshot)” परियोजना के वैज्ञानिको ने अल्फा सेंटारी तारा प्रणाली की ओर इस सदी के अंत से पहले नन्हे अंतरिक्ष यान भेजने की योजना बनाई है। लेकिन इस ग्रह से निकट भविष्य मे कोई सूचना आने की आशा ना रखें। प्रकाशगति की 20% गति से चलने वाले अंतरिक्ष यान को प्राक्सीमा सेंटारी तक पहुंचने मे ही 20 वर्ष लग जायेंगे, उसके पश्चात उससे पृथ्वी तक कोई सूचना पहुंचने मे 4.24 वर्ष लग जायेंगे।
खगोल विज्ञान मे रूची रखने वाले जानते होंगे कि अल्फ़ा सेंटारी तारा प्रणाली मे किसी ग्रह की खोज की यह पहली खबर नही है। 2012 मे कुछ वैज्ञानिको ने इस प्रणाली के सूर्य के जैसे तारे अल्फ़ा सेंटारी बी की परिक्रमा करते पृथ्वी के द्रव्यमान के तुल्य वाले ग्रह की खोज की घोषणा की थी। लेकिन बाद के निरीक्षणो के इस ग्रह के अस्तित्व की पुष्टि नही हो आयी थी। यह माना गया था कि प्राप्त आंकड़ो मे कोई त्रुटि थी तथा इस तारे की आंतरिक गतिविधियों ने वैज्ञानिको को भ्रमित कर दिया था। इस ग्रह को प्राक्सीमा बी नाम दिया गया है और इस खोज के पीछे पेल रेड डाट(धूंधला लाल बिंदु (Pale Red Dot) अभियान के वैज्ञानिक है। यह नाम कार्ल सागन द्वारा नामकरण किये गये पृथ्वी के प्रसिद्ध चित्र Pale Blue Dot से प्रभावित है।
वैज्ञानिको के अनुसार यह खोज आश्चर्य मे डालने वाली नही है। पिछले दशक मे हुयी सौर बाह्य ग्रहों की खोज ने प्रमाणित किया है कि प्राक्सीमा सेंटारी जैसे लाल वामन तारों के पास ग्रहों के होने की संभावना अधिक होती है और इन तारो की परिक्रमा करते ग्रह छोटे, चट्टानी तथा सतह पर द्रव जल की उपस्थिति के लिये पर्याप्त रूप से उष्ण होते है।इस ग्रह को प्राक्सीमा बी नाम दिया गया है और इस खोज के पीछे पेल रेड डाट(धूंधला लाल बिंदु (Pale Red Dot) अभियान के वैज्ञानिक है। यह नाम कार्ल सागन द्वारा नामकरण किये गये पृथ्वी के प्रसिद्ध चित्र Pale Blue Dot से प्रभावित है।
वैज्ञानिको के अनुसार यह खोज आश्चर्य मे डालने वाली नही है। पिछले दशक मे हुयी सौर बाह्य ग्रहों की खोज ने प्रमाणित किया है कि प्राक्सीमा सेंटारी जैसे लाल वामन तारों के पास ग्रहों के होने की संभावना अधिक होती है और इन तारो की परिक्रमा करते ग्रह छोटे, चट्टानी तथा सतह पर द्रव जल की उपस्थिति के लिये पर्याप्त रूप से उष्ण होते है।क्या रूसी वैज्ञानिको ने एलियन सभ्यता के संकेत ग्रहण किये है ?
30 अगस्त 2016 से इंटरनेट (भारतीय मिडीया भी) मे सेती(SETI- “Search for Extraterrestrial Intelligence”) द्वारा एलीयन सभ्यता के संकेत पाये जाने के समाचार आ रहे है। लेकिन वैज्ञानिक इन समाचारो पर अभी तक सहमत नही है।
HD 164595 नामक सूर्य के जैसे तारे से रूसी खगोल वैज्ञानिक द्वारा ’कृत्रिम’ रेडियो संकेत पाये गये है। यह तारा हमसे 94 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है, खगोलिय पैमाने पर यह तारा हमारे पास मे ही है। इस तारे के पास नेपच्युन के आकार के ग्रह की उपस्थिति के स्पष्ट प्रमाण है।
मिडीया इन समाचार से उछल गया है और उन्होने एलियन सभ्यता की खोज की घोषणा कर दी है। उनके अनुसार सेती अंतरिक्ष से आये एक परग्रही रेडियो संकेतो की जांच कर रहा है। लेकिन दूसरी ओर वैज्ञानिक अभी सशंकित है, उनके अनुसार यदि यह किसी एलियन सभ्यता से उत्सर्जित रेडियो संकेत है तो वह सभ्यता काफ़ी उन्नत सभ्यता होगी। वे उस सभ्यता को कार्दाशेव पैमाने पर वर्ग II मे रख रहे है। लेकिन उनके अनुसार यह सब अभी दूर की कौड़ी है।
खगोल वैज्ञानिको के अनुसार इस तरह के संकेत अप्रत्याशित नही है, वे इस तरह के विचित्र संकेत अक्सर पाते रहते है और जांच के पश्चात ये संकेत हमेशा निराश कर देते है, जांच मे कुछ नही निकलता है। अधिकाशत: इस तरह के संकेत प्राकृतिक कारणो से उत्पन्न होते है जिनमे खगोलिय ज्वाला(stellar flare) या पृथ्वी मे ही उत्पन्न रेडियो संकेत का किसी वस्तु से परावर्तित होकर वापस आना होता है। किसी एलियन सभ्यता से उत्सर्जित संकेतो के सत्यापन के लिये वैज्ञानिको को वे संकेत एकाधिक बार प्राप्त होना चाहिये लेकिन ऐसा होता नही है।(ऐसे ही एक संकेत
इसका अर्थ यह है कि एलियन सभ्यता के स्वागत समारोह को अभी स्थगित रखा जाये।
सेती वैज्ञानिक मानते है कि इस रेडियो संकेत की अभी जांच आवश्यक है और पूरी संभावना है कि कहीं ना कहीं कुछ गलत है।
बार्कली सेती(Berkeley SETI) के खगोल वैज्ञानिक एरिक कोर्पेला (Eric Korpela) ने इसे एक सनसनीखेज समाचार ही माना है जोकि परग्रही सभ्यता की खोज मे कोई महत्व नही रखता है। वे कहते है कि
मैने इस संकेत का प्रस्तुतिकरण देखा है। हम इससे प्रभावित नही है। इस तारे की जांच के 39 प्रयोगो मे से केवल एक बार 4.5 गुणा अधिक शक्ति का संकेत दिखायी दिया है जो कि आंकड़े ग्रहण करने मे एक त्रुटि से संभव है। SETI@Home प्रयोगो मे इस तरह के लाखों संकेत देखे गये है। किसी परग्रही सभ्यता के संकेत होने के लिये इसके अतिरिक्त और भी बहुत कुछ चाहिये। जिसमे संकेतो का एकाधिक बार प्राप्त होना न्यूनतम मानक है।
इन संकेतो को एक रेडियो आवृत्ति के चौड़े पट्टे(broad band measurement) मे मापा गया है, इस संकेत मे ऐसा कुछ नही है कि उसे किसी प्राकृतिक रेडियो संकेत उत्सर्जक(radio transient) से अलग किया जा सके, जिसमे खगोलिय ज्वाला(stellar flare), सक्रिय आकाशगंगा केंद्रक(active galactic nucleus), पृष्ठभूमी के किसी स्रोत के संकेतो पर माइक्रोलेंसीग प्रभाव का समावेश है। इस तरह के संकेत किसी कृत्रिम उपग्रह के दूरबीन के सामने से गुजरने से भी प्राप्त किये जा सकते है। ये संकेत सेती प्रोजेक्ट के नजरिये से महत्वहीन है।
Wow! संदेश : 15 अगस्त 1977 को सेटी मे कार्यरत डा जेरी एहमन ने ओहीयो विश्वविद्यालय के बीग इयर रेडीयो दूरबीन पर एक रहस्यमयी संदेश प्राप्त किया। इस संदेश ने परग्रही जीवन से संपर्क की आशा मे नवजीवन का संचार कर दिया था। यह संदेश 72 सेकंड तक प्राप्त हुआ लेकिन उसके बाद यह दूबारा प्राप्त नही हुआ। इस रहस्यमय संदेश मे अंग्रेजी अक्षरो और अंको की एक श्रंखला थी जो कि अनियमित सी थी और किसी बुद्धिमान सभ्यता द्वारा भेजे गये संदेश के जैसे थी। डा एहमन इस संदेश के परग्रही सभ्यता के संदेश के अनुमानित गुणो से समानता देख कर हैरान रह गये और उन्होने कम्प्युटर के प्रिंट आउट पर “Wow!” लिख दिया जो इस संदेश का नाम बन गया।
कोर्पेला के अनुसार किसी परग्रही(एलियन) सभ्यता द्वारा उत्सर्जित संकेतो मे कुछ विशिष्ट गुण होना चाहिये जिससे खगोल वैज्ञानिक उसे जांच के लायक मान कर आगे प्रयोग करे।
वे संकेतो को निम्नलिखित शर्तो के पूरा करने पर जांच योग्य मानते है :
संकेत स्थायी होना चाहिये। इस संकेत को निरीक्षण करने पर आकाश के उसी स्थान पर एकाधिक बार पाया जाना चाहिये।
इस संकेत को आकाश के एक ही स्थान से प्राप्त होना चाहिये।
यदि हम स्रोत को पुन: निरीक्षण करें तो संकेत दोबारा प्राप्त होना चाहिये।
इस संकेतो की विश्वसनियता बढ़ाने के लिये निम्नलिखित शर्ते है :
इन संकेतो की आवृत्ति(frequency) ज्ञात संकेतो की आवृत्ति(frequency) से भिन्न होना चाहिये।
इन संकेतो मे प्राप्त डाप्लर विचलन सौर मंडल के संदर्भ मे स्थिर होना चाहिये।
इन संकेतो के गुणधर्म(बैंड विड्थ, एनकोडींग) मे किसी बुद्धिमान सभ्यता द्वारा निर्मित होने के गुण होना चाहिये।
दुर्भाग्य से रूसी वैज्ञानिको द्वारा निरीक्षण मे प्रयुक्त विधि से इस संकेतो का उपरोक्त शर्तो पर सत्यापन कठीन है।
ये संकेत स्थाई नही है।
स्रोत के पुनः निरीक्षण पर संकेत दोबारा नही पाये गये।
संकेतो की आवृत्ति ज्ञात नही की जा सकी।
संकेतो मे डाप्लर विचलन ज्ञात नही किया जा सकता।
निरीक्षण मे प्रयुक्त संकेतो की आवृत्ति पट्टे मे कई त्रुटि उत्पन्न करने वाले कारक जैसे कृत्रिम उपग्रह उपस्थित है।
इन संकेतो की जांच मे कुछ भी महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त नही की जा सकी है।
HD 164595
HD 164595
HD 164595 तारे की दिशा की ओर से प्राप्त इन संकेतो को रूसी वैज्ञानिको ने मई 2015 मे खोजा गया था, लेकिन इस जानकारी को अन्य वैज्ञानिको के साथ एक वर्ष बाद अगस्त 2016 मे साझा किया गया। उसके पश्चात अन्य वैज्ञानिको ने इस संकेतो के पुन: निरीक्षण के प्रयास किये लेकिन उन्हे ये संकेत दोबारा प्राप्त नही हुये जिससे इस दिशा मे आगे बढ़ा जा सके।
सेती संस्थान(SETI Instititute) के वरिष्ठ वैज्ञानिक सेठ शोस्तक(Seth Shostak) के अनुसार :
एलन दूरबीनो के जाल(Allen Telescope Array (ATA)) को 28 अगस्त की शाम से HD 164595 की दिशा मे मोड़ा गया था। सेती के वैज्ञानिक जान रिचर्ड तथा गेरी हार्प के अनुसार ATA द्वारा खोजे जा सकने वाले अंतरिक्ष के बड़े भाग मे उन्होने कोई संकेत नही पाये है।
बार्कले सेती के वैज्ञानिको ने भी अपने उपकरणो से इन संकेतो की जांच की लेकिन उन्हे भी कुछ नही मिला। बुद्धिमान एलियन जीवन की उपस्थिति के प्रमाणो की अनुपस्थिति का अर्थ किसी भी तरह से एलियन सभ्यता की अनुपस्थिति का प्रमाण नही होता है। लेकिन हमारी दूरबीनो ने HD 164595 की दिशा से आते कोई रेडियो संकेत नही पकड़े है।
शोस्तक कहते है कि
” एलियन सभ्यता से संकेत प्राप्ति की संभावना अच्छी नही है लेकिन हमे सारी संभावनाओं की जांच करना चाहिये। यह एक महत्वपूर्ण विषय है”
HD 164595 से प्राप्त इतने मजबूत सकेंत को उत्पन्न करने भारी मात्रा मे ऊर्जा चाहियेKIC 8462852 : एलीयन सभ्यता ? एक बार फ़िर से चर्चा मे
हमारे ब्रह्मांड मे ढेर सारी अबूझ पहेलीयाँ है, लेकिन पिछले कुछ समय से विश्व के खगोलशास्त्री एक अजीब सी उलझन में फंसे हुए हैं। इसकी वजह है एक अनोखा तारा। यह तारा काफी रहस्यमय है। इससे जुड़ी बातें इसे किसी भी अन्य ज्ञात तारे से अलग बनाती हैं।
यह तारा 2015 के अंतिम महिनो मे तथा 2016 के आरंभिक महिनो मे चर्चा मे आया था। यह तारा दो वर्ष पश्चात मई 2017 मे फ़िर से वैज्ञानिको की चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है, वर्तमान के नये निरीक्षणो ने इस तारे की विचित्रता को फ़िर से उभारा है। इस तारे के प्रकाश मे वैसी ही कमी देखी जा रही है जो दो वर्ष पहले देखी गई थी। लेकिन इस बार यह कमी हम सीधे देख रहे है जबकि इसके पहले के निरीक्षणो मे हमने आंकड़े पिछले निरीक्षणो से पाये थे। समस्त विश्व के खगोल वैज्ञानिक दूरबीन से प्राप्त निरीक्षणो को लेकर ट्विटर पर सक्रिय हो चूके है।
यह तारा KIC 8462852 है, जोकि नासा के केप्लर अभियान के द्वारा निरीक्षित लाखों तारो मे से एक है। यह नाम टेबेथा बोयाजिअन(Tabetha Boyajian) के नाम पर है जो कि इस तारे की विचित्रता को पता लगाने वाली वैज्ञानिको की टीम की प्रमुख है। इस तारे को अब टैबी के तारे(Tabby’s Star) के नाम से भी जाना जाता है। KIC 8462852 तारा सूर्य से अधिक द्रव्यमान वाला, अधिक उष्ण तथा अधिक चमकिला है। वह पृथ्वी से लगभग 1,500 प्रकाशवर्ष दूर है, यह दूरी थोड़ी अधिक है और इस तारे को नग्न आंखो से देखना कठिन है। इस तारे से प्राप्त केप्लर अंतरिक्ष वेधशाला के आंकड़े विचित्र है। इस तारे के प्रकाश मे कमी आती देखी गयी है, लेकिन उसका अंतराल नियमित नही है। प्रकाश मे आने वाली कमी की मात्रा भी अधिक है, एक बार प्रकाश पंद्रह प्रतिशत कम हुआ था तो एक बार 22 प्रतिशत। केप्लर के आंकड़ो के आने से इस तारे के प्रकाश मे कमी सैंकड़ो बार देखी गयी है। प्रकाश मे आने वाले कमी के अंतराल मे किसी भी तरह की नियमितता नही है, कमी एक अनिश्चित अंतराल पर, अनिश्चित मात्रा मे हो रही है। इस कमी का व्यवहार भी अजीब है। किसी ग्रह से अपने मातृ तारे के प्रकाश मे आने वाली कमी का आलेख मे एक सममिती(Symmetry) होती है; प्रकाश पहले हल्का धीमा होता है , थोड़े अंतराल के लिये उसी मात्रा मे धीमा रहता है और वापस अपनी पुर्वावस्था मे आ जाता है। KIC 8462852 तारे के प्रकाश के निरीक्षण के 800 वे दिन के आंकड़ो मे ऐसा नही देखा गया है, प्रकाश धीरे धीरे कम होता है और अचानक तीव्रता से बढ़ता है।1500 वे दिन प्रकाश मे आने वाली मुख्य कमी के आलेख मे अनेक छोटी छोटी कमी की एक श्रृंखला है। इसके अलावा इस तारे के प्रकाश मे हर 20 दिन के पश्चात कुछ सप्ताह के लिए प्रकाश मे कमी होती है, कुछ समय बाद ये कमी गायब हो जाती है। कुल मिलाकर इस प्रकाश मे आने वाली कमी मे कोई निरंतरता नही है। यह अनियमित संक्रमणो के जैसा है और विचित्र है। 2015 मे प्राप्त आंकड़े इतने विचित्र थे कि कुछ वैज्ञानिको ने इस तारे के आसपास एक विशालकाय कृत्रिम रूप से निर्मित एलियन मेगास्ट्रक्चर की कल्पना कि थी जोकि तारे के चारो ओर बना सौरपैनलो का एक महाकाय गोला “डायसन स्फ़ियर” हो सकता है। ऐसा गोला इस तारे के प्रकाश को रोक सकता है। पेन विश्वविद्यालय के खगोल वैज्ञानिक जैसन राईट कहते है
यह तारा KIC 8462852 है, जोकि नासा के केप्लर अभियान के द्वारा निरीक्षित लाखों तारो मे से एक है। यह नाम टेबेथा बोयाजिअन(Tabetha Boyajian) के नाम पर है जो कि इस तारे की विचित्रता को पता लगाने वाली वैज्ञानिको की टीम की प्रमुख है। इस तारे को अब टैबी के तारे(Tabby’s Star) के नाम से भी जाना जाता है। KIC 8462852 तारा सूर्य से अधिक द्रव्यमान वाला, अधिक उष्ण तथा अधिक चमकिला है। वह पृथ्वी से लगभग 1,500 प्रकाशवर्ष दूर है, यह दूरी थोड़ी अधिक है और इस तारे को नग्न आंखो से देखना कठिन है। इस तारे से प्राप्त केप्लर अंतरिक्ष वेधशाला के आंकड़े विचित्र है। इस तारे के प्रकाश मे कमी आती देखी गयी है, लेकिन उसका अंतराल नियमित नही है। प्रकाश मे आने वाली कमी की मात्रा भी अधिक है, एक बार प्रकाश पंद्रह प्रतिशत कम हुआ था तो एक बार 22 प्रतिशत। केप्लर के आंकड़ो के आने से इस तारे के प्रकाश मे कमी सैंकड़ो बार देखी गयी है। प्रकाश मे आने वाले कमी के अंतराल मे किसी भी तरह की नियमितता नही है, कमी एक अनिश्चित अंतराल पर, अनिश्चित मात्रा मे हो रही है। इस कमी का व्यवहार भी अजीब है। किसी ग्रह से अपने मातृ तारे के प्रकाश मे आने वाली कमी का आलेख मे एक सममिती(Symmetry) होती है; प्रकाश पहले हल्का धीमा होता है , थोड़े अंतराल के लिये उसी मात्रा मे धीमा रहता है और वापस अपनी पुर्वावस्था मे आ जाता है। KIC 8462852 तारे के प्रकाश के निरीक्षण के 800 वे दिन के आंकड़ो मे ऐसा नही देखा गया है, प्रकाश धीरे धीरे कम होता है और अचानक तीव्रता से बढ़ता है।1500 वे दिन प्रकाश मे आने वाली मुख्य कमी के आलेख मे अनेक छोटी छोटी कमी की एक श्रृंखला है। इसके अलावा इस तारे के प्रकाश मे हर 20 दिन के पश्चात कुछ सप्ताह के लिए प्रकाश मे कमी होती है, कुछ समय बाद ये कमी गायब हो जाती है। कुल मिलाकर इस प्रकाश मे आने वाली कमी मे कोई निरंतरता नही है। यह अनियमित संक्रमणो के जैसा है और विचित्र है। 2015 मे प्राप्त आंकड़े इतने विचित्र थे कि कुछ वैज्ञानिको ने इस तारे के आसपास एक विशालकाय कृत्रिम रूप से निर्मित एलियन मेगास्ट्रक्चर की कल्पना कि थी जोकि तारे के चारो ओर बना सौरपैनलो का एक महाकाय गोला “डायसन स्फ़ियर” हो सकता है। ऐसा गोला इस तारे के प्रकाश को रोक सकता है। पेन विश्वविद्यालय के खगोल वैज्ञानिक जैसन राईट कहते है
नासा ने हमारे सौर मंडल के तुल्य एक तारा-ग्रह प्रणाली खोजी है जिसके पास आठ ग्रह है। इस तारे का नाम केप्लर 90 है
। केप्लर 90 और सौर मंडल के ग्रहों के आकार की तुलना केप्लर 90 और सौर मंडल के ग्रहों के आकार की तुलना अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा को एक बड़ी सफलता मिली है। NASA के केपलर अंतरिक्ष दूरबीम ने हमारे जितना बड़ा ही एक और तारा-ग्रह प्रणाली खोजी है। दरअसल, यह तारा और उसके ग्रह पहले ही खोजे गये था, अब वहीं पर आठवें ग्रह की भी पहचान कर ली गई है। ऐसे में सूर्य या उस जैसे किसी तारे की परिक्रमा करने के मामले में केपलर-90 प्रणाली की तुलना हमारे सौरमंडल से की जा सकती है। इसका अर्थ यह है कि केप्लर 90 के पास हमारे सूर्य के जैसे आठ ग्रह है। इसके पहले केप्लर 90 मे ट्रेपिस्ट -1 के जैसे सात ग्रह ज्ञात थे। खास बात यह है कि इस खोज में गूगल की ओर से कृत्रिम बुद्धि( आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) की मदद ली गई, जो मानवों के रहने योग्य ग्रहों की तलाश करने में काफी मदद करेगा। केपलर-90 ग्रह प्रणाली के इस आठवें ग्रह का नाम केपलर 90i है। गूगल और नासा के इस प्रॉजेक्ट द्वारा हमारे जैसे ही सौर मंडल की खोज से इस बात की उम्मीद बढ़ी है कि ब्रह्मांड में किसी ग्रह पर परग्रही( ऐलियन) मौजूद हो सकते हैं। दिलचस्प है कि केपलर-90 के ग्रहों की व्यवस्था हमारे सौर मंडल जैसी ही है। इसमें भी छोटे ग्रह अपने तारे से नजदीक हैं और बड़े ग्रह उससे काफी दूर मौजूद हैं। NASA के अनुसार, इस खोज से पहली बार स्पष्ट होता है कि दूर कहीं तारा प्रणाली में हमारे जैसे ही सौर परिवार मौजूद हो सकते हैं। यह सौर मंडल हमसे करीब 2,545 प्रकाश वर्ष दूर है। नासा ने बताया कि इस ग्रह का तापमान करीब 800 डिग्री फारेनहाइट (426 डिग्री सेल्सियस) है। नया खोजा ग्रह केपलर 90i इन ग्रहों में सबसे छोटा ग्रह है। यह ग्रह पृथ्वी की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत बड़ा होने का अनुमान है। केपलर 90i पृथ्वी की तरह एक पथरीला ग्रह है। केपलर 90i पर पृथ्वी की तरह एक वर्ष का समय दो हफ्तों का होगा। क्योंकि ये अपनी तारे की परिक्रमा में 14.4 दिन में कर लेता है। एंड्रयू वंडरबर्ग ने कहा कि केप्लर-90 का धरातल बुध ग्रह की तरह ही बहुत ज्यादा गर्म है।
टेक्ससयूनिवर्सिटी के नासा सगन पोस्टडॉक्टरल फेलो एवं खगोल विज्ञानी एंड्रयू वांडबर्ग ने कहा,
। केप्लर 90 और सौर मंडल के ग्रहों के आकार की तुलना केप्लर 90 और सौर मंडल के ग्रहों के आकार की तुलना अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा को एक बड़ी सफलता मिली है। NASA के केपलर अंतरिक्ष दूरबीम ने हमारे जितना बड़ा ही एक और तारा-ग्रह प्रणाली खोजी है। दरअसल, यह तारा और उसके ग्रह पहले ही खोजे गये था, अब वहीं पर आठवें ग्रह की भी पहचान कर ली गई है। ऐसे में सूर्य या उस जैसे किसी तारे की परिक्रमा करने के मामले में केपलर-90 प्रणाली की तुलना हमारे सौरमंडल से की जा सकती है। इसका अर्थ यह है कि केप्लर 90 के पास हमारे सूर्य के जैसे आठ ग्रह है। इसके पहले केप्लर 90 मे ट्रेपिस्ट -1 के जैसे सात ग्रह ज्ञात थे। खास बात यह है कि इस खोज में गूगल की ओर से कृत्रिम बुद्धि( आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) की मदद ली गई, जो मानवों के रहने योग्य ग्रहों की तलाश करने में काफी मदद करेगा। केपलर-90 ग्रह प्रणाली के इस आठवें ग्रह का नाम केपलर 90i है। गूगल और नासा के इस प्रॉजेक्ट द्वारा हमारे जैसे ही सौर मंडल की खोज से इस बात की उम्मीद बढ़ी है कि ब्रह्मांड में किसी ग्रह पर परग्रही( ऐलियन) मौजूद हो सकते हैं। दिलचस्प है कि केपलर-90 के ग्रहों की व्यवस्था हमारे सौर मंडल जैसी ही है। इसमें भी छोटे ग्रह अपने तारे से नजदीक हैं और बड़े ग्रह उससे काफी दूर मौजूद हैं। NASA के अनुसार, इस खोज से पहली बार स्पष्ट होता है कि दूर कहीं तारा प्रणाली में हमारे जैसे ही सौर परिवार मौजूद हो सकते हैं। यह सौर मंडल हमसे करीब 2,545 प्रकाश वर्ष दूर है। नासा ने बताया कि इस ग्रह का तापमान करीब 800 डिग्री फारेनहाइट (426 डिग्री सेल्सियस) है। नया खोजा ग्रह केपलर 90i इन ग्रहों में सबसे छोटा ग्रह है। यह ग्रह पृथ्वी की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत बड़ा होने का अनुमान है। केपलर 90i पृथ्वी की तरह एक पथरीला ग्रह है। केपलर 90i पर पृथ्वी की तरह एक वर्ष का समय दो हफ्तों का होगा। क्योंकि ये अपनी तारे की परिक्रमा में 14.4 दिन में कर लेता है। एंड्रयू वंडरबर्ग ने कहा कि केप्लर-90 का धरातल बुध ग्रह की तरह ही बहुत ज्यादा गर्म है।
टेक्ससयूनिवर्सिटी के नासा सगन पोस्टडॉक्टरल फेलो एवं खगोल विज्ञानी एंड्रयू वांडबर्ग ने कहा,
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