प्रकृति में ऐसे अनेक अजीब स्थान और अजीबोगरीब चीजे
बिखरी पडी है, जो मनुष्य के लिए पहेलियों के सिवा कुछ
भी नहीं ! ऐसे पहेलियाँ, जिन्हे सुलझाने के प्रयास में मानव
मस्तिष्क खुद ही उलझता जाता है, ऐसे ही एक जटिल और
सर खपाने वाली पहेली सं 1996 में सामने आई !
1996 के फरवरी माह में चाँद पर उतरे रूसी यान, लूना-9
ने चन्द्र धरातल के कुछ ऐसे चित्र धरती पर भेजे थे, जिन्हे
देखकर वैज्ञानिक आश्चर्य एवं विस्मय से भर गए ! वे उन
चित्रो को देखकर उनके बारे में कोई संतोषजनक उत्तर
न दे सके !
भेजे गए चित्र एक ऐसे क्षेत्र के थे, जहाँ पत्थरों की एक सीध
में जाती हुई कई लम्बी लम्बी कतारे थी ! ये चित्र चाँद के
जिस हिस्से के थे, उसे कथित रूप से "ओशन ऑफ़ स्टोमर्स"
कहा जाता है ! पत्थरो से निर्मित वे रहस्यमय कतारे बहुत
ही सफाई से एक सीध में बनी हुई थे और आश्चर्यजनक
रूप से हर पत्थर एक ही अकार एवं प्रकार का था ! सिर्फ
इतना ही नहीं , कतारो में लगे पत्थरो की दूरी भी विलक्षण
रूप से समान थी ! ऐसा लगता था मानो किसी ने चन्द्र
धरातल पर उतरने के लिए "एयरपोर्ट " के सामान निशान
लगे रखे थे !
आज तक वैज्ञानिक उन रहस्यमय पत्थरो से निर्मित लम्बी
लम्बी कतारो का कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए है !
अगर वे कटारे प्राकृतिक थे , तो इतनी सारी कतारे और प्रत्येक
कतार में लगे पत्थर में इतनी नफासत कैसे थी? या इसके
निर्माण में क्या किन्ही अदृश्य शक्तयो का हाथ था? शायद
आने वाला कल इन सभी सवालो के जवबाब लेता आए,
परन्तु अभी तक इसे नहीं जाना जा सका है !
अगर आपको ये कहानी पसंद आए हो तो like जरूर करे !
बिखरी पडी है, जो मनुष्य के लिए पहेलियों के सिवा कुछ
भी नहीं ! ऐसे पहेलियाँ, जिन्हे सुलझाने के प्रयास में मानव
मस्तिष्क खुद ही उलझता जाता है, ऐसे ही एक जटिल और
सर खपाने वाली पहेली सं 1996 में सामने आई !
1996 के फरवरी माह में चाँद पर उतरे रूसी यान, लूना-9
ने चन्द्र धरातल के कुछ ऐसे चित्र धरती पर भेजे थे, जिन्हे
देखकर वैज्ञानिक आश्चर्य एवं विस्मय से भर गए ! वे उन
चित्रो को देखकर उनके बारे में कोई संतोषजनक उत्तर
न दे सके !
भेजे गए चित्र एक ऐसे क्षेत्र के थे, जहाँ पत्थरों की एक सीध
में जाती हुई कई लम्बी लम्बी कतारे थी ! ये चित्र चाँद के
जिस हिस्से के थे, उसे कथित रूप से "ओशन ऑफ़ स्टोमर्स"
कहा जाता है ! पत्थरो से निर्मित वे रहस्यमय कतारे बहुत
ही सफाई से एक सीध में बनी हुई थे और आश्चर्यजनक
रूप से हर पत्थर एक ही अकार एवं प्रकार का था ! सिर्फ
इतना ही नहीं , कतारो में लगे पत्थरो की दूरी भी विलक्षण
रूप से समान थी ! ऐसा लगता था मानो किसी ने चन्द्र
धरातल पर उतरने के लिए "एयरपोर्ट " के सामान निशान
लगे रखे थे !
आज तक वैज्ञानिक उन रहस्यमय पत्थरो से निर्मित लम्बी
लम्बी कतारो का कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए है !
अगर वे कटारे प्राकृतिक थे , तो इतनी सारी कतारे और प्रत्येक
कतार में लगे पत्थर में इतनी नफासत कैसे थी? या इसके
निर्माण में क्या किन्ही अदृश्य शक्तयो का हाथ था? शायद
आने वाला कल इन सभी सवालो के जवबाब लेता आए,
परन्तु अभी तक इसे नहीं जाना जा सका है !
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